लेखनी कहानी -06-Oct-2024
अगर लहजा तेरा,दो पल को मीठा हो गया होता। दिलों में जो कदूरत है, मदावा हो गया होता। ❤️ जवाबन उसके लहजे में ज़ुबां हम खोल सकते थे। हमे भी तैश आ जाता तो झगड़ा हो गया होता। ❤️ न जाने किस लिए वो हर घड़ी ग़मगीन रहता है। उसे जिसकी भी चाहत थी,उसी का हो गया होता। ❤️ मुकम्मल हो गई होती कहानी यह मोहब्बत की। अधूरा लफ्ज़,तुम मिलते तो पूरा हो गया होता। ❤️ तू पारस है तेरी खूबी,ज़माना क्यों नही समझा। अगर तू लोहा छू लेता तो सोना हो गया होता। ❤️ 'सगीर' उसके बिना ठहरा हुवा हो वक्त भी जैसे। अगर वो शाम को आता सवेरा हो गया होता।
Anjali korde
23-Jan-2025 06:08 AM
👌👌
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